– संध्या भारद्वाज
पुत्री श्री राजकिशोर शर्मा
बी .ए. प्रथम वर्ष
एक बड़ी ही सुंदर फुलवारी ,
उस फुलवारी में बड़े ही सुंदर-सुंदर पुष्प लगे।
उन पुष्पों में दो पुष्प बड़े ही सुन्दर,
और पाँच पुष्प थे नन्हे-नन्हें।
बड़े पुष्प के साथ उन नन्हें पुष्पों का जीवन जुड़ गया ,
उन पुष्पों में प्यार और भी बढ़ गया ।
हरपल खिलखिलाते थे वे पुष्प,
एक दूजे का सहारा थे वे पुष्प।
अचानक एक ऐसी रात आई,
उस रात ने भी तबाही मचाई।
उन दो पुष्पों का जोड़ा टूट गया ,
एक सुन्दर पुष्प बेचारा सूख गया ।
वो पुष्प जो था उसका सच्चा साथी ,
उससे उसका दामन छूट गया ।
बिलख उठे पाँचों पुष्प सुन्दर पुष्प ने उन्हें समझाया ,
पुष्प का सूख जाना नियम है प्रकृति का ।
हमें आगे बढ़ना ही होगा , मुसीबतों से लड़ना ही होगा ।
उस सुन्दर पुष्प ने जो बात कही ,
वो नन्हें पुष्पों के दिल में ढल गई।


