जीवनशैली से उत्पन्न बीमारियाँ:भारतीय संदर्भ में

                                                                                             –  डॉ मनोरमा यादव
असिस्टेंट प्रोफेसर गृहविज्ञान
महिला महाविद्यालय
आंवलखेड़ा आगरा

                                                                                               

भारत में स्थिति काफी चिंताजनक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत की पहचान ऐसे देश के रूप में की है जहां निकट भविष्य में जीवनशैली से जुड़े विकार सर्वाधिक होंगे। मधुमेह की वैश्विक राजधानी के रूप में पहले से ही पहचान बना चुका भारत एक और नकारात्मक उपलब्धि हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और मैक्स अस्पताल द्वारा किए गए एक संयुक्त अध्ययन के अनुसार उच्च रक्तचाप मोटापा और हृदय रोग के मामले विशेष तौर पर युवा और शहरी युवा आबादी में खतरनाक गति से बढ़ रहे हैं। चिकित्सकों के कथनानुसार वसायुक्त भोजन की अत्यधिक मात्रा और अल्कोहल के साथ निष्क्रिय जीवन पध्दति ही मोटापे मधुमेह और उच्च रक्तचाप के लिए जिम्मेदार हैं।

भारत में जीवनशैली से संबंधित रोगों के बारे में गंभीर तथ्य
मोटापा

भारत में मोटापे की समस्या लगातार बढ़ रही है और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक अध्ययन में कहा गया है कि यह परेशानी महामारी का रूप ले सकती है। एक महत्वपूर्ण अध्ययन में कहा गया है कि देश की 1.2 अरब की आबादी में से करीब 13 फीसदी लोग मोटापे से पीड़ित हो सकते हैं।  भारत के शहरी क्षेत्रों में 31 फीसदी लोग मोटापे से पीडि़त हैं। मोटापे से हृदय रोग होने की संभावना तिगुनी हो जाती है। यह विडंबना ही है क्योंकि हाल तक देश में कुपोषण एक बड़ी समस्या रहा है। अब ऐसा लगता है कि मोटापा कुपोषण पर हावी होता जा रहा है। मोटापा या सामान्य से अधिक वजन होने की समस्या दरकिनार भले ही कर दी जाए लेकिन यह जीवनशैली के कारण होने वाली बीमारियों जैसे मधुमेह, रक्तचाप, आघात और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ाने वाला एक कारक हो सकती है।

भारत में वजन बढ़ने का मुख्य कारण बढ़ते शहरीकरण, मशीनीकृत परिवहन का उपयोग, फास्ट फूड का सेवन, लंबे समय तक टीवी देखना और ऐसी चीजों का अधिक सेवन है जिनमें पोषक गुण कम होते हैं।

प्रमुख भारतीय मधुमेह विशेषज्ञ और गुड़गांव स्थित मेदान्ता अस्पताल में एंडोक्राइनोलॉजी एवं डायबिटीज विभाग के प्रमुख डॉ अंबरीश मित्तल ने कहा, भारत में सबसे बड़ी समस्या बच्चों में मोटापे की है। संपन्नता और शहरीकरण से जुड़े मोटापे की समस्या के कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप और दिल की बीमारी जैसी गैर संचारी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। युवाओं में बढ़ती मधुमेह की समस्या की जड़ भी मोटापे की बढ़ती समस्या से जुड़ी है।  इससे निपटने के लिए हमें खानपान, अभ्यास और खास तौर पर बच्चों के लिए स्कूलों और कार्य स्थलों में स्वास्थ्यकर आहार विकल्प के बारे में जागरूकता की जरूरत है।

किसी मोटे व्यक्ति में संभावित रूप से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं विकसित होने की अधिक संभावना हैजिसमें शामिल हैं:

  • उच्च ट्राइग्लिसराइड्स और कम उच्च घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (HDL) कोलेस्ट्रॉल
  • मधुमेह प्रकार 2
  • उच्च रक्त चाप
  • मेटाबोलिक सिंड्रोम – उच्च रक्त शर्करा, उच्च रक्तचाप, उच्च ट्राइग्लिसराइड्स और कम एचडीएल कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग, स्ट्रोक का एक संयोजन
  • कैंसर – गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा, एंडोमेट्रियम, अंडाशय, स्तन, बृहदान्त्र, मलाशय, घेघा, यकृत, पित्ताशय, अग्न्याशय, गुर्दे और प्रोस्टेट के कैंसर
  • स्लीप एपनिया सहित श्वास विकार, एक संभावित गंभीर नींद विकार जिसमें बार-बार सांस रुक जाती है और शुरू होती है
  • पित्ताशय का रोग
  • स्त्री रोग संबंधी समस्याएं, जैसे बांझपन और अनियमित मासिक धर्म, पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि रोग (PCOD)
  • स्तंभन दोष और यौन स्वास्थ्य के मुद्दे
  • गैर अल्कोहल वसा यकृत रोग – एक ऐसी स्थिति जिसमें वसा यकृत में बनता है और सूजन या घाव उत्पन्न कर सकता है
  • घुटनों और रीढ़ से संबंधित समस्याओं का ऑस्टियोआर्थराइटिस

जीवनशैली में परिवर्तन करके ही मोटापे से बचाव संभव

डॉ.गिल ने बताया कि भुजंगासन, शलभासन, उत्तानपादासन, सर्वागासन, हलासन, सूर्य नमस्कार करना चाहिए। ऐसे करने से बीमारियों बहुत कम होती हैं। इन आसनों दो-दो मिनट करने और कपालभाति कम से कम 5 मिनट करने से शरीर रोगमुक्त रहता है। सुबह जल्दी उठकर व्यायाम सैर अति आवश्यक है। इससे शरीर को ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में मिलती है। कॉर्बन डाई ऑक्साइड बाहर निकल जाती है। इससे शरीर की सभी प्रणाली सुचारू रूप से कार्य करती है। शरीर मोटापा का शिकार नहीं होता।

हृदयरोग
देश में हर एक लाख लोगों में 272 लोग की मौत हृदय रोग संबंधी बीमारियों  से हो रही है जो कि दुनिया के औसत 235 से कहीं ज्यादा है और विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार 2016 में अकेले भारत में हृदय रोग से मरने  वाले 45 फीसदी लोगों की उम्र 40-69 वर्ष के बीच थी। इन परिस्थितियों में विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते इलाज और बीमारी का पता लगाना और नियंत्रित जीवन शैली जीवन को बचा सकती है। इसकी एक बड़ी वजह हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों के कारण  (वसा का जमाव) और ब्लॉकेज उत्पन्न कर देते हैं। जहां तक हृदय रोगियों का संबंध है भारत का स्थान सर्वप्रथम है। भारत में कुल जनसंख्या का 10 फीसदी इस रोग से पीडि़त है। इसकी तुलना में अमेरिका/यूरोप और चीन में क्रमश: 7 और 4 फीसदी लोग इस रोग से पीडि़त हैं।

हृदय रोग के कारण

निष्क्रिय जीवन शैली, अत्यधिक तनाव, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, ज्यादा धूम्रपान, मोटापा, वसायुक्त भोजन ग्रहण करना ऐसे कारण हैं जो इस रोग को आमंत्रित करते हैं। साथ ही जिनका कोलेस्ट्रोल, ट्राईग्लिसराइड और वीएलडीएल, एलडीएल ज्यादा होता उनके इस रोग की चपेट में आने की संभावना अधिक होती है।

जीवन शैली में बदलाव

इसके अलावा हृदय रोग से पीड़ित मरीज अपनी जीवनशैली में बदलाव कर भी हृदय को स्वस्थ रखा जा सकता है। इसके लिए वजन को अनियंत्रित नहीं होने देना, प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट, सप्ताह में 5 दिन व्यायाम करना, कम मात्रा में शराब का सेवन करना, धूम्रपान छोड़ना जैसे कदम हैं। अगर आपको मधुमेह है, तो जीवनशैली में बदलाव और दवाओं से इसे नियंत्रण में रखें। यानी अपने एचबीए1सी को 6-7 के बीच रखें। यदि आपको हाई ब्लड प्रेशर है, तो बीपी को 130/80 के स्तर से नीचे रखना जरूरी है। हार्ट के मरीज ज्यादा भारी काम न करें, डायबिटीज और हाइपरटेंशन के मरीजों को शुगर व ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण रखना चाहिए। एक सप्ताह में कम से कम पांच दिन व्यायाम जरुरी है। तंबाकू के सेवन से भी परहेज करना चाहिए। वसायुक्त भोजन से दूर रहे, ताजे फल एवं सब्जियों का भरपूर सेवन करना चाहिए। चिकनाई युक्त पदार्थ नहीं खाना चाहिए। रचनात्मक और मनोरंजक कार्यो में मन लगाए।

मधुमेह

आज विश्व के 3 प्रतिशत से 12 प्रतिशत लोग या तो मधुमेह सी पीड़ित हैं अथवा उनके मधुमेह से पीड़ित हैं अथवा उनके मधुमेह से पीड़ित होने की संभवना है। समाचार पत्रों में प्रकाशित “विश्व स्वास्थय संगठन” की एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार “ सन 2025 तक भारत दुनिया का डायबिटीक कैपिटल हो जाएगा। यानि उस वक्त तक डाइबिटीज के सबसे अधिक रोगी भारत में होंगे और उनकी संख्या यहाँ लगभग 5.7 करोड़ होगी। जहाँ तक देश की राजधानी दिल्ली का सवाल है तो यहाँ की कुल आबादी (लगभग 1.45 करोड़ ) के 12 फीसदी लोग डाइबिटीज के घोषित मरीज हैं”

“भारतीय मधुमेह संगठन” के अनुसार शहरी जीवन शैली में बदलाव, अधिक मसालेदार भोजन, कम व्यायम, बढ़ता तनाव, जेनेटिक तथा पर्यावरणीय कारणों से मधुमेह का खतरा 60% तक अधिक बढ़ जाता है । मधुमेह के रोगियों में अन्य रोगियों की तुलना में हृदयघात का तीन गुना अधिक हो जाता है । समाचार पत्रों में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग चार करोड़ भारतीय मधुमेह के साथ जी रहे हैं।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार मधुमेह से होने वाली 80 प्रतिशत मृत्यु निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में होती है। गत वर्ष के आंकड़ों के अनुसार भारत में 7.2 करोड़ लोग मधुमेह से पीडि़त हैं। इसमें से 3.6 करोड़ से ज्यादा लोगों में मधुमेह का पता ही नहीं चलता हैं। ऐसा अनुमान है कि विश्व में मधुमेह से पीडि़त होने वाला हर पांचवा व्यक्ति भारतीय है। आमतौर पर मधुमेह के 90.95 प्रतिशत रोगी टाइप 2 या से पीडि़त होते हैं। मधुमेह एवं डायबिटीज रोग विशेषज्ञ डॉ.पी.पी.पाटीदार ने बताया की भारत युवाओं का देश है और डायबिटीज रोग अब युवा शक्ति को ही खाने में लगा हुआ है।

कैंसर 
भारत में कुल स्वास्थ्य गिरावट के लिए कैंसर का आनुपातिक योगदान 1990 से 2016 तक दोगुना हो गया है, लेकिन अलग-अलग राज्यों में विभिन्न प्रकार के कैंसरों में व्यापक रूप से भिन्नता देखने को मिली हैं। 2016 में भारत में कुल मृत्यु का 8.3% कैंसर के कारण था, जो 1990 में हुए कैंसर के योगदान से दोगुना है। भारत में कैंसर के मामलों की अनुमानित संख्या 1990 में 5.48 लाख से बढ़कर 2016 में 10.6 लाख हो गई। 2016 में पाए गए प्रमुख कैंसरों में पेट (9%), स्तन (8·2%), फेफड़े (7·5%), होंठ और मुंह का कैंसर (7·2%), गले के कैंसर के अलावा नेसोफैरेनिक्स कैंसर (6·8%), आंत और गुदा के कैंसर (5·8%), ल्यूकेमिया (5·2%), और गर्भाशय (5·2%) कैंसर शामिल हैं।

कैंसर होने के संभावित कारण

  • धूम्रपान-सिगरेट या बीडी, के सेवन से मुंह, गले, फेंफडे, पेट और मूत्राशय का कैंसर होता है।
  • तम्‍बाकू, पान, सुपारी, पान मसालों, एवं गुटकों के सेवन से मुंह,  जीभ खाने की नली,  पेट,  गले,  गुर्दे और अग्‍नाशय (पेनक्रियाज) का कैंसर होता है।
  • शराब के सेवन से श्‍वांस नली, भोजन नली, और तालु में कैंसर होता है।
  • धीमी आचॅं व धूंए मे पका भोजन (स्‍मोक्‍ड) और अधिक नमक लगा कर संरक्षित भोजन, तले हुए भोजन और कम प्राकृतिक रेशों वाला भोजन(रिफाइन्‍ड) सेवन करने से बडी आंतो का कैंसर होता है।
  • कुछ रसायन और दवाईयों से पेट, यकृत(लीवर) मूत्राशय के कैंसर होता है।

कैंसर से बचाव के उपाय

  • लगातार और बार-बार घाव पैदा करने वाली परिस्थितियों से त्‍वचा, जीभ, होंठ, गुर्दे, पित्‍ताशय,  मुत्राशय का कैंसर होता है।
  • कम उम्र में यौन सम्‍बन्‍ध और अनेक पुरूषों से यौन सम्‍बन्‍ध द्वारा बच्‍चेदानी के मुंह का कैंसर होता है।
  • धूम्रपान, तम्‍बाकु, सुपारी, चना, पान, मसाला, गुटका, शराब आदि का सेवन न करें।
  • विटामिन युक्‍त और रेशे वाला ( हरी सब्‍जी, फल, अनाज, दालें) पौष्टिक भोजन खायें।
  • कीटनाशक एवं खाद्य संरक्षण रसायणों से युक्‍त भोजन धोकर खायें।
  • अधिक तलें, भुने, बार-बार गर्म किये तेल में बने और अधिक नमक में सरंक्षित भोजन न खायें।
  • अपना वजन सामान्‍य रखें।
  • नियमित व्‍यायाम करें नियमित जीवन बितायें।
  • साफ-सुथरे, प्रदूषण रहित वातावरण की रचना करने में योगदान दें।
  • प्रारम्भिक अवस्‍था में कैंसर के निदान के लिए निम्‍नलिखित बातों का विशेष ध्‍यान दें
  • मूंह में सफेद दाग या बार-बार होने वाला घाव।
  • शरीर में किसी भी अंग या हिस्‍से में गांठ होने पर तुरन्‍त जांच करवायें।
  • महिलायें माहवारी के बाद हर महीने स्‍तनों की जॉंच स्‍वयं करे स्‍तनों की जॉंच स्‍वयं करने का तरीका चिकित्‍सक से सीखें।
  • दो माहवारी के बीच या माहवारी बन्‍द होने के बाद रक्‍त स्‍त्राव होना खतरे  की निशानी है पैप टैस्‍ट करवायें।
  • शरीर में या स्‍वास्‍थ्‍य में किसी भी असामान्‍य परिवर्तन को अधिक समय तक न पनपने दें।
  • नियमित रूप से जॉंच कराते रहें और अपने चिकित्‍सक से तुरन्‍त सम्‍पर्क करें।
  • याद रहे- प्रारम्भिक अवस्‍था में निदान होने पर ही सम्‍पूर्ण उपचार सम्‍भव है।

 स्वस्थ जीवन बनाए रखने के लिए इन कुछ युक्तियों का पालन करें:

अस्वस्थ जीवनशैली और खानपान की गलत आदतों के कारण होने वाली बीमारियों को जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां कहा जाता है। ये बीमारियां न तो संक्रमण से फैलती हैं, न ही आनुवंशिक होती हैं, हां आनुवंशिक कारक इनमें प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। शारीरिक सक्रियता की कमी, तनाव के बढ़ते स्तर, अनिद्रा, जंक फूड के सेवन और गैजेट्स के बढ़ते चलन से जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पहले इन बीमारियों को वयस्कों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब ये तेजी से युवाओं को ही नहीं, बच्चों को भी अपना शिकार बना रही हैं। अनुशासित जीवनशैली द्वारा न केवल इनसे बचा जा सकता है, बल्कि अगर आप अपनी खराब जीवनशैली और किन्हीं अन्य कारणों से इनकी चपेट में आ जाएं तो अपनी जीवनशैली में परिवर्तन लाकर इन्हें नियंत्रित भी किया जा सकता है। 

  • अच्छी सेहत रहने के वाबजूद भी अपना सालाना स्वास्थ्य परीक्षण उचित समय से करवाएं। अपने आप की रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, रक्त में चीनी की मात्रा, बीएमआई आदि जाँच करवाने से स्वास्थ्य सामान्य-सीमा में हैं या नहीं को निर्धारित करने में मदद मिलेगी।
  • तनाव को सामान्य रखने के लिए योग और साँस लेने के व्यायाम अच्छे उपाय हैं। अपने जीवन में रोजाना इन व्यायाम का अभ्यास करें ताकि तनाव को कम किया जा सके और अपने हृदय को स्वस्थ रखा जा सके।
  • पर्याप्त नींद स्वस्थ हृदय के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक है। इस उम्र में 6-8 घंटे की नींद आपके लिए जरूरी है।
  • स्वस्थ रहने से सभी बीमारियों से लड़ने में मदद मिलती है। अपने व्यस्तता के दिनों में भी हर दिन 30-40 मिनट की तेज चाल न केवल हृदय रोग, मधुमेह के खतरे को कम करने में मदद करेगी बल्कि आपको वजन को नियंत्रित करने में भी मदद करेगी।
  • डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) कहता है कि 18-64 आयु वर्ग के स्वस्थ वयस्कों को स्वस्थ रहने के लिए एक सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम-तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि (जैसे चलना या तैरना) करना चाहिए।
  • अधिक फल और सब्जियों का सेवन करें साथ ही साथ सोडा और मीठे पेय पदार्थ से बचें।
  • खुद को वसायुक्त लाल मांस का सेवन करने से रोकें।
  • स्वस्थ हृदय के लिए धूम्रपान और शराब सबसे बड़ी समस्या है। यदि आप धूम्रपान करते हैं तो छोड़ देना चाहिए।

राष्ट्रीय पोषण संस्थान के दिशा निर्देशों में भारतीयों को पहले की तुलना में कम कैलोरी वाला भोजन लेने की सलाह दी गई है साथ ही भोजन को पांच समूहों में बांटा गया है जिसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि किस खाद्य समूह में कितनी कैलोरी हासिल करनी चाहिए | संस्थान के वरीष्ठ वैज्ञानिक सुब्बाराव के अनुसार नई खानपान दिशानि निर्देशो में दैनिक कैलोरी की मात्रा कम करने की सिफारिश की जा रही है उदाहरण के लिए मौजूदा दिशानिर्देशों में संदर्भ के तौर पर 65 किलोग्राम वजन तथा 5.64 फुट लंबे पुरुषों के लिए रोजाना 2100 कैलोरी भोजन प्रतिदिन लेने की सिफारिश की गई है लेकिन नए  दिशानिर्देशों में इसे घटाकर 1800 कैलोरी किया जा रहा है तथा 55 किलोग्राम वजन एवं 5.2 फिट लंबी महिला के लिए 1660 कैलोरी भोजन की जरूरत बताई गई है |

संदर्भ ग्रंथ-

  • राष्ट्रीय पोषण संस्थान ने स्वास्थ्यजीवन के लिए गाइडलाइन तैयार की, 4 अप्रैल 2022 हिंदुस्तान, WWW.livehindusthan.com
  • जीवनशैली रोग : आसन्न वैश्विक संकट, 30 जुलाई 2011, जागरण जोश |
  • बदलें जीवनशैली, दूर रहेंगी बीमारियां, शमीम खान, 16 जनवरी 2018, हिंदुस्तान |
  • मोटापा बिना किसी चेतावनी के जान लेने वाली बीमारी है, Narayana health, 11 मार्च 2021 |
  • जीवनशैली के विकास भारतीय परिदृश्य, विकासपीडिया |

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combined e-magazine for session 2019-20, 2020-21, 2021-22 published by Mata Bhagwati Devi Rajkiya Mahila Mahavidyalay

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