– क्रान्ती कुमारी
बी.ए. प्रथम वर्ष
ऐ चाँद सवेरा देखले तू ,
इस दुनिया में क्या हो रहा -2
पिता ने पाला बेटा को आज,
बेटा ही धोखा दे रहा ।।
ऐ चाँद सवेरा देखले तू ,
इस दुनिया में क्या हो रहा -2
कहता बेटा नहीं छेड़ना बहनों को ,
वो ही आज बहनों को छेड़ रहा ।।
ऐ चाँद सवेरा देखले तू ,
इस दुनिया में क्या हो रहा -2
कहता बेटा भाई को पढा ऊगा ,
जुआ की खातिर भाई की पढ़ाई रोक रहा ।।
ऐ चाँद सवेरा देखले तू ,
इस दुनिया में क्या हो रहा -2
कहता बेटा माँ का मन्दिर बनवाऊँगा ,
आज माँ को ही घर से निकाल रहा ।।
ऐ चाँद सवेरा देखले तू ,
इस दुनिया में क्या हो रहा -2
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