
हिन्दी व्यथा
– कु. गार्गी त्यागी बी.ए. तृतीय वर्ष ‘‘ऐ कलम तू उठ खड़ी हो कदम अपने खोल दे है

– कु. गार्गी त्यागी बी.ए. तृतीय वर्ष ‘‘ऐ कलम तू उठ खड़ी हो कदम अपने खोल दे है

– कु. ज्योति शर्मा बी .ए. तृतीय वर्ष सोचो अगर नारी दुर्गा न होती ………… किसी बंधन-बेड़ियो से

– कु. रश्मी गुप्ता बी .ए. प्रथम वर्ष जब मैनें पहली बार लिखी थी कविता नहीं था विश्वास

– कु. नंदिनी वर्मा बी .ए. तृतीय वर्ष उगते सूरज की आभा है हिन्दी । नि र्मल जल

– कु. प्रीती बाला सागर पुत्री श्री बनी सिं ह बी .ए. तृतीय वर्ष प्रस्तावनाः भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम

– कु. शीतल पुत्री श्री रामनिवास बी .ए. प्रथम वर्ष ‘‘तू भारत का गौरव का है, तू जननी

– कु0 उमेश पुत्री श्री वेद प्रकाश बी .ए. तृतीय ‘‘भरा नहीं जो भावों से, बहती जिसमें रसधार

– मनमोहन भारद्वा ज गायत्री माँ वरदानआँवल खेड़ा की शान,माता भगवती के प्रेरणा से,शिक्षा का अनुदान,धवल देश का

सुरेन्द्र कुमार पटेलअसि0 प्रोफेसर-हिन्दीराजकीय महिला महाविद्यालय आॅवलखेड़ा कविता और समाज में बहुत निकट का संबंध होता है। समाज

– डॉ मनोरमा यादवअसिस्टेंट प्रोफेसर गृहविज्ञानमहिला महाविद्यालयआंवलखेड़ा आगरा भारत में स्थिति काफी चिंताजनक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन
Menace Of Terrorism (With Special Reference Of Bioterrorism) (Dr. Yashpal Chaudhari)