– कु. ज्योति शर्मा
बी .ए. तृतीय वर्ष
सोचो अगर नारी दुर्गा न होती …………
किसी बंधन-बेड़ियो से आजाद न हो ती
बंद रहती एक पिजड़ें में पक्षियों की तरह
एक भी उड़ान आसान न हो ती ………..
सोचो अगर नारी दुर्गा न होती …………..
चाँद कल्पना की कल्पना ही न होती
मुकाबले में मेरी कॉम ने धूल न चटाई होती
सोचो अगर झाँसी की रानी वीर नहीं सती होती ….
सोचो अगर नारी दुर्गा न होती ……….
मेहन्दी वाले हाथों में गुड़िया न होती
कदम से कदम मिलाने वाली
दो कदम आगे न होती ………….
सोचो अगर नारी दुर्गा न होती ……
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