– स्वाती चौहान
पुत्री श्री देवेंद्र सिंह चौहान
बी .ए. द्वितीय वर्ष
हि न्दी हूँ मैं संभालो मुझे,
बहुत हुआ अब बचालो मुझे।
पुरखों की आशा , बुजुर्गों की भाषा ।
संस्कृति संवाहक बनालो मुझे,
बहुत हुआ अब बचालो मुझे।।
हिन्दी हूँ मैं हिन्दुस्तान है मुझसे,
मैं मातृ भाषा करो दुःख-दर्द साझा।
समय है अभी भी संभालो मुझे,
सरताज अपना बनालो मुझे
बहुत हुआ अब बचालो मुझे।।
हिन्दी ही है गुरू कबिरा की वानी ,
जिसमें कही तुलसी ने जनमानस की कहानी ।
रचें जिसमें वर्तमान औ भविष्य का ख्बाव सारा ,
फले-फूले जिसमें हिंदुस्तान हमारा
जय हिन्द की ऐसी भाषा बनालो मुझे,
बहुत हुआ अब बचालो मुझे।।
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